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January 13, 2012

सोच रहा हूँ... एक गर्लफ्रेंड बना लूं...

सोच  रहा  हूँ  बहुत  दिनों  से ,
एक  गर्लफ्रेंड  बना  लूं .
वाट  पहले  से  ही  लगी  पड़ी  है ,
थोड़ी  और  लगवा  लूं .

पैसे  खर्च  करने  पड़ेंगे  धो-धो  के,
ये  तो  बहुत  हद  तक  पता  है .
मगर  कुछ  पाने  के  लिए ,
बहुत  कुछ  खोना  भी  तो पड़ता  है .

scream दिन  रात  फ़ोन  मेरा  कुछ  इस  तरह  चिल्लाएगा ,
के  खुद  ही  के  फ़ोन  से  डर  लगने  लग  जाएगा.
उसकी  चांय चांय  काँय  काँय  से ,
जो बिल* अभी देश के विकास की तरह मद्ध्म है
वही  बोल्ट**  की  स्पीड  से  मैराथन  दौड़  लगाएगा .

लेकिन  ये  भी  है , वो  दिमाग  चाटेगी ,
 तो  भेजा  रिफ्रेश  हो  जाएगा .
जब  उसी की सुनने से  फुर्सत  ना  मिलेगी ,
 तो  कोई  और  क्या  सुनाएगा !

टेंशन  जिंदगी  में  पहले  से  बहुत  हैं ,
उसके  आ  जाने  से और  बढ़  ही  जायेंगी.
लेकिन  कम  से  कम  इस  बोरिंग  जिंदगी  में
वो कुछ  डिसट्रेक्शन  तो  लाएगी .

"सही  है  भाई , दोस्ती  सही  तूने  निभाली.
साले! हम  घास  छीलते  हैं  तो  भी  तुझे  बता  कर ,
और  तूने  बिना  बताये , बंदी  पटा  ली ,
चल  कोई  नहीं  ये  बता , अब  पार्टी  देगा  कहाँ पर ,
और  कमीने  हमें  'भाभी'  से  कब  मिलवाएगा ?"
कुछ  इस  तरह  दोस्तों  में  अपना  भी  रौब  बढ़  जाएगा .

तो अब  सोच  ही  लिया  है ,
एक  गर्लफ्रेंड  बना  ही  ली  जाए .
अगर  खुदखुशी  करनी  ही  है ,
तो  खुद ही  की  ख़ुशी  से  क्यों  ना  की  जाए ?



*बिल : फोन का बिल, ना की पार्लियामेंट वाला बिल
**बोल्ट : उसेन बोल्ट